तीन दिन की हड़ताल, दिल्ली में आम जनता के लिए परेशानी का दौर
नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों में उछाल के साथ-साथ दूध, ब्रेड जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रही दिल्ली की जनता की परेशानियां आने वाले दिनों में और ज्यादा बढ़ सकती हैं। अपनी विभिन्न मांगों और मुख्य रूप से किराया बढ़ाने की मांग को लेकर दिल्ली के ट्रांसपोर्टरों, ऑटो और टैक्सी चालकों ने आगामी 21 से 23 तारीख तक तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दिया है।
ग्रीन टैक्स और ट्रकों की नो-एंट्री से नाराज हैं ट्रांसपोर्टर्स
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ट्रांसपोर्टर्स का मुख्य विरोध कमर्शियल (व्यावसायिक) वाहनों पर लगाए जाने वाले हरित शुल्क (ग्रीन टैक्स) को लेकर है। इसके साथ ही पर्यावरण और प्रदूषण का हवाला देकर दिल्ली सीमा के भीतर ट्रकों के प्रवेश पर बार-बार लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से भी ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोग काफी नाराज हैं। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि इन नियमों के कारण उनका व्यापार चौपट हो रहा है, जिसके विरोध में वे तीन दिनों तक पूरी तरह चक्काजाम रखेंगे।
महंगी CNG के बाद ऑटो-टैक्सी चालकों ने की किराया बढ़ाने की मांग
दूसरी ओर, राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों ने भी इस हड़ताल को अपना पूरा समर्थन दिया है। सीएनजी ($CNG$) की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से परेशान चालकों का कहना है कि मौजूदा किराए में गाड़ी चलाना अब उनके बजट से बाहर हो गया है। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि ईंधन के बढ़े दामों के अनुपात में यात्रियों के किराए में भी तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी की जाए, ताकि वे अपनी आजीविका चला सकें।
महा-आंदोलन को मिला कई बड़े संगठनों का समर्थन
'ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट संगठन' द्वारा दिए गए इस हड़ताल के आह्वान को व्यापक समर्थन मिलता दिख रहा है। इस आंदोलन में मालवाहक गाड़ियों के साथ-साथ निजी सवारी वाहन, ऑटो, काली-पीली टैक्सी और ऐप आधारित कैब से जुड़े कई अन्य यूनियनों ने भी शामिल होने की घोषणा की है। यदि यह तीन दिवसीय हड़ताल होती है, तो राजधानी की रफ्तार थम सकती है और आम जनता को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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