गोपनीय तरीके से मदद करने वाले अधिकारियों पर शक, सीबीआई तक पहुंचा जांच का आवेदन 

ग्वालियर, जबलपुर और भोपाल जाने वाला “लिफाफा” इंदौर क्यों घूम आया अब इसी सवाल पर तेज हुई चर्चाएं 

✍️ पंकज सिंह भदौरिया 

 भोपाल । प्रदेश में शराब कारोबार और उससे जुड़े कथित गोरखधंधों को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सूत्रों के अनुसार सोम कंपनी से जुड़े कुछ मामलों में कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ अधिकारी गोपनीय तरीके से कंपनी को लाभ पहुंचाने में लगे हुए हैं, जबकि विभागीय स्तर पर कई फाइलें और कार्रवाई लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी हुई हैं।

 संदिग्ध मूवमेंट का उल्लेख 

सूत्र बताते हैं कि एक एक्सपर्ट द्वारा पूरे मामले की गोपनीय जांच कराने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को आवेदन भेजा गया है। आवेदन में कथित आर्थिक अनियमितताओं, विभागीय संरक्षण और फाइलों के संदिग्ध मूवमेंट का उल्लेख किया गया है।

 कई बड़े अधिकारी जांच के दायरे में आने की आशंका 

जानकारी के मुताबिक, इस गोपनीय आवेदन में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम और उनकी भूमिका से जुड़े दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। यदि जांच आगे बढ़ती है तो कुछ बड़े अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विभागीय गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि कई फैसले नियमों से अधिक “प्रभाव” के आधार पर लिए गए।

“ लिफाफा” इंदौर क्यों पहुंचा? 

पूरा मामला उस “लिफाफे” को लेकर और ज्यादा चर्चाओं में आ गया है, जिसे ग्वालियर, जबलपुर और भोपाल पहुंचना बताया जा रहा था, लेकिन वह इंदौर घूमने पहुंच गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर उस गोपनीय दस्तावेज को इंदौर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी? सूत्रों का कहना है कि इस घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मामले को प्रभावित करने या जानकारी लीक होने से रोकने के लिए फाइलों और दस्तावेजों का रास्ता बदला गया। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 निष्पक्ष जांच की मांग 

 यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल है।