वकीलों का प्रदर्शन जारी, कई इलाकों में लगा लंबा जाम
नई दिल्ली : उपराज्यपाल की ओर से 13 अगस्त को जारी अधिसूचना के खिलाफ वकीलों का विरोध लगातार जारी है। सोमवार सुबह से ही राजधानी की सातों जिला अदालतों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसर के बाहर सड़क पर उतरकर पोस्टर-बैनर के साथ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान वकील काला कानून वापिस लो, वकील एकता जिंदाबाद, मनमानी नहीं चलेगी जैसे नारों के साथ विरोध प्रकट करते रहे। देर शाम जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मंगलवार को भी जिला अदालतों में कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा।
सोमवार को कड़कड़डूमा, तीस हजारी, पटियाला हाउस, रोहिणी, द्वारका, साकेत और राउज एवेन्यू अदालतों में कोई भी न्यायिक कार्य नहीं हुआ। वकीलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई जगह सड़कों पर जाम की स्थिति भी बन गई। इस दौरान अदालतों में वकील न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वर्चुअल माध्यम से पेश हुए। इस हड़ताल के चलते कई मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई और पक्षकारों को नई तारीखें दी गईं। हड़ताल के दौरान जिला अदालतों में पूरा कामकाज ठप रहा। समन्वय समिति के महासचिव अनिल बसोया ने कहा कि उपराज्यपाल का यह आदेश न केवल वकीलों के अधिकारों के खिलाफ है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करेगा। साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव धीर सिंह कसाना ने कहा कि इस अधिसूचना से गवाही और पेशियों की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
जमीन के बदले नौकरी मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होंगे वकील
जमीन के बदले नौकरी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत को आरोपियों के वकील ने बताया कि वकीलों की हड़ताल होने के चलते वह पेश नहीं हो सके। न्यायाधीश ने 26 अगस्त को आरोपियों के वकीलों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा का लाभ उठाने के लिए कहा। रेलवे में यह नियुक्ति 2004 से 2009 के बीच लालू के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई थी। संवाद
मुख्य गेट पर ताला लगाकर विरोध जताया
राउज एवेन्यू कोर्ट के मुख्य गेट पर वकीलों ने ताला लगाकर विरोध जताया। करीब एक घंटे तक कोर्ट का गेट बंद रखा और इस दौरान अधिवक्ता एलजी विनय कुमार सक्सेना के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास त्रिपाठी ने बताया जब तक यह नोटिफेकिशन वापस नहीं होता है। तब तक वकीलों की हड़ताल जारी रहेगी।
बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं अधिवक्ता
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर यह अधिसूचना वापस नहीं ली गई तो आंदोलन को और तेज करेंगे। शनिवार को वकीलों ने प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर कोर्ट परिसर में किसी भी पब्लिक पर्सन व पुलिस अधिकारियों को एंट्री नहीं दी थी। सोमवार को भी सीबीआई के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को कोर्ट में आने से रोका गया। अधिवक्ताओं की समन्वय समिति की बैठक दिल्ली की मुख्यमंत्री व अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी हो चुकी है।
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