सोम कंपनी पर सरकार की कड़ी कार्रवाई, आबकारी कमिश्नर का फैसला
नकली परमिट, अवैध टैंक और राजस्व हानि के आरोपों के बीच देपालपुर प्रकरण में डिस्टिलरी के दोनों लाइसेंस आगामी आदेश तक निरस्त
पंकज सिंह भदौरिया भोपाल। सोम कंपनी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने बड़ा निर्णय लेते हुए कंपनी की बियर फैक्ट्री और स्पिरिट फैक्ट्री (डिस्टिलरी) के लाइसेंस आगामी आदेश तक निरस्त कर दिए हैं। इस आदेश में अटॉर्नी जनरल से प्राप्त विधिक सुझाव के कुछ बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। यह पहला मामला नहीं है जब किसी विभाग ने अपने आदेश में अटॉर्नी जनरल की राय का हवाला दिया हो। इससे पूर्व सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) भी आरक्षण से जुड़े एक प्रकरण में अटॉर्नी जनरल के सुझावों को अपने आदेश में दर्ज कर चुका है।
न्यायालय, विधानसभा,शासन और प्रशासन को जगदीश और अजय अरोड़ा चकमा देने में कामयाब
आबकारी विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, सोम कंपनी पर शासन को राजस्व क्षति पहुंचाने, नियमों की अनदेखी और प्रशासन को गुमराह कर व्यापार संचालित करने जैसे गंभीर आरोप लंबे समय से लगे हुए हैं। 2011 में बगैर परमीशन टैंक बनाने का मामला भी जाँच के सामने आया जिन्हें आज भी नियमों के विरुद्ध संचालित किया जा रहा था।दो बार इस मामले को अलग अलग विधायकों द्वारा विधानसभा में उठाया गया मंत्री जगदीश देवड़ा ने जवाब में बार बार दोषी अधिकारियों और फैक्ट्री पर कार्यवाही करने की बात कही , लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ

सोम कम्पनी के गुंडे कर रहे आबकारी विभाग की अगुवाई
सोम कंपनी का नेटवर्क केवल नियम उल्लंघन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में दबाव और भय का माहौल बनाने के आरोप भी सामने आए हैं। कोलार क्षेत्र में एक महिला को कुचलने की घटना, अपहरण से जुड़े मामले और होटल-रेस्टोरेंट में कथित अवैध शराब गतिविधियों को लेकर भी कंपनी का नाम सामने आता रहा है, जिनकी जांच अलग-अलग स्तरों पर चलती रही है।
नकली परमिट और फर्जी नेटवर्किंग के कारण हुआ लायसेंस निरस्त इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए देपालपुर में पकड़े गए नकली परमिट प्रकरण में आबकारी आयुक्त ने डिस्टिलरी के दोनों लाइसेंस निरस्त करने का निर्णय लिया। आदेश के बाद सोम कंपनी की दोनों फैक्ट्रियों की गतिविधियां फिलहाल ठप हो गई हैं।
इस बार भी सोम कंपनी के मालिकान गुमराह करके बच निकलेंगे
हालांकि, विभागीय हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि पूर्व की तरह इस बार भी कंपनी के मालिक शासन-प्रशासन पर दबाव बनाकर राहत पाने का प्रयास कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि पहले भी सोम कंपनी पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उसने विभिन्न संस्थानों, नियामक एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रियाओं में तथ्यों को अपने पक्ष में प्रस्तुत कर कार्रवाई से बचने की कोशिश की। फिलहाल, आबकारी विभाग का यह कदम प्रदेश में शराब उद्योग से जुड़े नियमों के पालन को लेकर अब तक की सबसे सख्त कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया में क्या रुख अपनाया जाता है।
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