सोने की कीमतों में गिरावट: क्या अब पैसा लगाने का सही समय आ गया है?
नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और घरेलू स्तर पर हाजिर मांग में कमी के चलते शुक्रवार, 10 जुलाई को भारतीय वायदा बाजार (MCX) में बहुमूल्य धातुओं के दामों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। सुबह के कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों में जहां मामूली गिरावट दर्ज की गई, वहीं चांदी के भाव मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। अगस्त डिलीवरी वाले सोने के अनुबंधों में सुबह 9:15 बजे गिरावट देखी गई, जबकि इसके विपरीत सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में हल्की तेजी का माहौल बना रहा।
वैश्विक तनाव और फेडरल रिजर्व की चिंता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पीली धातु की कीमतों में इस हफ्ते गिरावट की आशंका गहरा गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते इस बात की संभावना प्रबल हो गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। फेड की पिछली बैठक के ब्योरे से भी यह साफ हुआ है कि नीति निर्माता मध्य पूर्व के संकट और उच्च मुद्रास्फीति को लेकर बेहद सतर्क हैं। आंकड़ों के मुताबिक, आगामी सितंबर महीने में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
मध्य पूर्व का संकट और बाजार पर असर
आमतौर पर सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन जब केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीतियों को सख्त करते हैं, तो बिना ब्याज देने वाली इस परिसंपत्ति के आकर्षण में कमी आती है और इसकी कीमतें दबाव में आ जाती हैं। इस बीच, पश्चिम एशिया में हवाई हमलों का सिलसिला तेज हो गया है, जिससे क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। ताजा सैन्य घटनाक्रमों के कारण दोनों देशों के बीच होने वाले अंतरिम समझौते पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं, जिसका सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है।
तकनीकी स्तर और विशेषज्ञों की राय
बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक सोने की कीमतें एक निश्चित दायरे से ऊपर टिकी हुई हैं, तब तक हर गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाना फायदेमंद हो सकता है। मौजूदा समय में सोने के लिए ऊपरी स्तरों पर कड़ा प्रतिरोध देखा जा रहा है और अगर कीमतें इस बाधा को पार कर जाती हैं, तो आने वाले दिनों में बड़ी तेजी का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल वैश्विक बाजार और भारतीय वायदा बाजार दोनों में ही महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर सक्रिय हैं, जिन पर व्यापारियों को पैनी नजर रखनी होगी।
निवेशकों के लिए मुनाफावसूली की सलाह
मौजूदा अनिश्चित माहौल को देखते हुए कमोडिटी विश्लेषकों ने निवेशकों को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी के लिए तय सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स के बीच भारी उतार-चढ़ाव की उम्मीद है। वीकेंड की शुरुआत होने और अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर बनी असमंजस की स्थिति के बीच बाजार के जानकारों का कहना है कि ट्रेडर्स को हर छोटी-बड़ी तेजी पर अपनी लॉन्ग पोजीशन से मुनाफा समेटने (प्रॉफिट बुकिंग) पर ध्यान देना चाहिए, ताकि किसी भी अप्रत्याशित जोखिम से बचा जा सके।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का कंगना ने किया समर्थन, CJP विवाद पर दी प्रतिक्रिया
गुरुग्राम से लौट रहे दो दोस्तों की सड़क हादसे में मौत, द्वारका एक्सप्रेसवे पर हुआ हादसा
तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिका-पाकिस्तान में बढ़े पेट्रोल के दाम
छात्रों से मुलाकात के बाद केजरीवाल का हमला, ‘लोकतंत्र में ऐसी कार्रवाई चिंताजनक’
HC का बड़ा फैसला, अब मेदांता अस्पताल में होगा सोनम वांगचुक का उपचार