देपालपुर विवाद: प्रीति गायकवाड़ को राहत नहीं, शीर्ष अदालत सख्त
सोम की लाइसेंस बहाली पर हाईकोर्ट हो सकता है सख्त
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने की पैरवी, याचिका खारिज; विवादित सोम कंपनी के लाइसेंस विवाद पर भी बढ़ी चर्चा
नई दिल्ली /भोपाल। देपालपुर प्रकरण में प्रीति गायकवाड़ की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह मामला प्रीति गायकवाड़ बनाम मप्र राज्य के रूप में दर्ज था। खंडपीठ में शामिल Justice मनोज मिश्रा जी और Justice मनमोहन जी ने 24 फरवरी 2026 को मोशन हियरिंग (बेल मैटर) के दौरान याचिका को डिसमिस कर दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा कर रहे थे पैरवी
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में प्रीति गायकवाड़ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा जी पैरवी कर रहे थे। यह भी चर्चा है कि इस स्तर के वरिष्ठ अधिवक्ता की फीस लगभग 10 से 15 लाख रुपये तक हो सकती है। राजनीतिक और कानूनी हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि एक बर्खास्त सब-इंस्पेक्टर इतनी बड़ी फीस का प्रबंधन कैसे कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सोम कंपनी की कथित भूमिका पर चर्चाएं
कुछ सूत्रों का दावा है कि प्रीति गायकवाड़ के केस में सोम कंपनी की ओर से कानूनी सहायता दी जा रही थी। हालांकि, कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गौरतलब है कि जिस मामले में सोम कंपनी के लाइसेंस निरस्त किए गए थे, उसमें प्रीति गायकवाड़ सहित कंपनी के कुछ डायरेक्टर्स को भी आरोपी माना गया था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बेल याचिका खारिज किए जाने के बाद यह तर्क सामने आ रहा है कि लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई prima facie सही आधार पर की गई थी।
लाइसेंस बहाली पर असर?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सोम कंपनी के लाइसेंस की बहाली की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय संबंधित वैधानिक और न्यायिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
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