2203 परमिटों के जरिए टैक्स, VAT, परिवहन शुल्क और ड्यूटी में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप; पूर्व आबकारी अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल 

✍️ पंकज सिंह भदौरिया 

इंदौर/भोपाल,। मध्यप्रदेश के देपालपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय के 23 दिसंबर 2023 के आदेश (केस नंबर 21/2021) से जुड़े सोम डिस्टिलरी के कथित नकली परमिट प्रकरण ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। आबकारी क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा की गई गणना के आधार पर इस मामले में लगभग 920 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का दावा किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, मामले में एक परमिट को एक ट्रक तथा प्रति ट्रक 1200 बॉक्स शराब के मानक पर गणना की गई है। प्रति बॉक्स 893 रुपये (ब्लू चिप व्हिस्की का EDP) मानते हुए आयकर, परिवहन शुल्क, VAT और आबकारी ड्यूटी का आकलन किया गया।

प्रति बॉक्स देय राशि का आकलन 

आयकर (2%) – ₹17.86
परिवहन शुल्क (8%) – ₹71.44
VAT (10%) – ₹89.30
आबकारी ड्यूटी – ₹3304
प्रति परमिट (1200 बॉक्स) अनुमानित देय राशि ,आयकर – ₹21,432
परिवहन शुल्क – ₹85,728
VAT – ₹1,07,160
आबकारी ड्यूटी – ₹39,64,800

2203 परमिटों पर कुल अनुमानित राशि 

 आयकर – ₹4,72,14,696
 परिवहन शुल्क – ₹18,88,58,784
VAT – ₹23,60,73,480
 आबकारी ड्यूटी – ₹8,73,44,54,400
 कुल संभावित घोटाला : ₹9,20,66,01,360 (लगभग 920 करोड़ रुपये)

जांच के घेरे में पूरा सिस्टम

इतने बड़े पैमाने पर कथित अनियमितता के दावों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि यदि यह घटनाक्रम हुआ, तो यह लंबे समय तक प्रशासनिक निगरानी से कैसे बचा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि संबंधित अवधि में पदस्थ रहे अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विशेष रूप से उस समय के आबकारी आयुक्त और प्रमुख सचिव (आबकारी) की कार्यप्रणाली एवं जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

 CBI और ED जांच की मांग तेज 

आबकारी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा इस पूरे मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष उठाने की तैयारी की जा रही है। मांग की जा रही है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं, संभावित मिलीभगत और प्रशासनिक जवाबदेही की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यदि लगाए गए आरोपों की जांच में पुष्टि होती है, तो यह मामला देश के सबसे बड़े कथित आबकारी घोटालों में से एक माना जा सकता है।