गार्ड ऑफ ऑनर के साथ CDS जनरल अनिल चौहान को दी गई सम्मानपूर्ण विदाई
नई दिल्ली: भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान शनिवार को देश के सर्वोच्च सैन्य पद से सेवानिवृत्त हो गए हैं। भारतीय सेना में चालीस साल से भी अधिक समय तक अपनी बेदाग और अनुकरणीय सेवाएं देने के बाद उन्हें बेहद गरिमामयी और औपचारिक समारोह में विदाई दी गई। अपने विदाई संबोधन में उन्होंने सेना में बिताए अपने लंबे सफर को अत्यंत शानदार, गौरवपूर्ण और संतोषजनक बताया।
इस विदाई प्रक्रिया के तहत शनिवार सुबह नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक के प्रांगण में जनरल चौहान को तीनों सेनाओं (थल, नभ और जल) की संयुक्त टुकड़ी द्वारा औपचारिक 'गार्ड ऑफ ऑनर' पेश किया गया। यह विशेष सम्मान देश के शीर्ष सैन्य कमांडर के रूप में उनके शानदार कार्यकाल की पूर्णता का प्रतीक था।
राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीदों को दी अंतिम श्रद्धांजलि
गार्ड ऑफ ऑनर की रस्म के बाद जनरल अनिल चौहान सीधे नेशनल वॉर मेमोरियल (राष्ट्रीय समर स्मारक) पहुंचे। वहाँ उन्होंने देश की संप्रभुता और रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों की अमर ज्योति पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके बाद मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने इस ऐतिहासिक सफर में मिले सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।
भावुक क्षणों को साझा करते हुए जनरल चौहान ने कहा, "वर्दी में रहते हुए तीनों सेनाओं से गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त करना मेरे जीवन के सबसे गौरवशाली क्षणों में से एक है। मैं इस सम्मान के लिए इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) मुख्यालय और अपने सभी सहयोगियों का दिल से धन्यवाद करता हूँ। इस विदाई के साथ ही मैं वर्दी में मौजूद अपने सभी बहादुर साथियों और सहकर्मियों को अलविदा कह रहा हूँ।" उन्होंने आगे कहा कि शहीद नायकों को सेना की वर्दी में अंतिम बार श्रद्धांजलि देना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद भावुक और स्मरणीय पल था।
सैनिक से नागरिक जीवन का नया सफर
जनरल चौहान ने अपने संदेश में कहा, "मैंने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को आखिरी बार सैनिक के रूप में नमन किया है। इसके बाद मेरे परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों ने मेरा स्वागत किया, जो मेरे सैन्य जीवन से अब एक आम नागरिक के जीवन में प्रवेश का प्रतीक है। देश की सेवा का मेरा यह पूरा कार्यकाल मेरे लिए आत्मसंतुष्टि से भरा रहा।"
चार दशकों का अद्वितीय और पदक-सम्मानित करियर
भारतीय सेना में एकीकरण के सूत्रधार जनरल अनिल चौहान ने साल 1981 में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित गोरखा राइफल्स में कमीशन प्राप्त किया था। अपने 40 वर्षों से अधिक के लंबे करियर के दौरान उन्होंने सेना के कई महत्वपूर्ण कमांड, ऑपरेशनल और रणनीतिक स्टाफ पदों पर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया। एक दूरदर्शी सैन्य रणनीतिकार के रूप में उन्होंने देश की रक्षा नीतियों को आधुनिक रूप देने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें अपने करियर में परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM), अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (SM) जैसे देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। बतौर सीडीएस, उन्होंने भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच थियेटराइजेशन (एकीकरण) और संयुक्त तालमेल को मजबूत करने के अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया।
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