बिल्डर का बयान—“रॉयल्टी ट्रक वालों के पास होगी”; खनिज विभाग की निगरानी पर उठे गंभीर प्रश्न, सरकार को राजस्व नुकसान 

✍️ पंकज सिंह भदौरिया✍️✍️ 

भोपाल। राजधानी के अवधपुरी इलाके में एक बिल्डर द्वारा विकसित की जा रही कॉलोनी में खनिज नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। कॉलोनी में जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जहां अंदर रेत के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं और सड़कों का निर्माण मोरम व गिट्टी से किया जा रहा है।

 बिल्डरों को खनिज रॉयल्टी संबंधी नियमों की जानकारी तक नहीं 

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब बिल्डर से रॉयल्टी को लेकर सवाल किया गया। बिल्डर ने साफ तौर पर कहा कि “रॉयल्टी मेरे पास नहीं है, वह तो ट्रक वालों के पास होगी।” इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि निर्माण कार्य में लगे कई बिल्डरों को खनिज रॉयल्टी संबंधी नियमों की जानकारी तक नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।

 जिम्मेदारी से बचने की कोशिश 

खनिज नियमों के अनुसार निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली रेत, गिट्टी और अन्य खनिज सामग्री की वैध रॉयल्टी होना अनिवार्य है। लेकिन यहां जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर पर डालकर बिल्डर खुद को बचाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।

ट्रैफिक पुलिस और खनिज विभाग के अधिकारी मूकदर्शक 

विभाग की निष्क्रियता पर सवाल

यह मामला खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब तक विभाग द्वारा यह जांच तक नहीं की गई कि जिन निर्माण परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर खनिज सामग्री का उपयोग हो रहा है, उनकी रॉयल्टी जमा की गई है या नहीं।

एक रॉयल्टी पर कई वाहन संचालित

स्थानीय सूत्रों के अनुसार एक ही रॉयल्टी पर कई-कई ट्रक सामग्री ढो रहे हैं। भारी वाहन सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं, जबकि ट्रैफिक पुलिस और खनिज विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

अवैध खनन और बिना रॉयल्टी सामग्री के उपयोग 

राजस्व में गिरावट का बड़ा कारण

भोपाल सहित प्रदेशभर में चल रहे सैकड़ों निर्माण प्रोजेक्ट्स के बावजूद खनिज से मिलने वाला राजस्व अपेक्षा से कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन और बिना रॉयल्टी सामग्री के उपयोग के कारण सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

कार्रवाई की दरकार 

इस पूरे मामले में अब जरूरत है सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करने की। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो अवैध खनन और राजस्व चोरी का यह सिलसिला लगातार बढ़ता रहेगा।