58 जिलों में फैला अवैध खनन नेटवर्क, राजधानी भोपाल तक में खुलेआम बिक्रीस्टाफ की कमी का बहाना, जांच के नाम पर खानापूर्ति 

✍️ पंकज सिंह भदौरिया ✍️✍️

भोपाल। मध्य प्रदेश के 58 जिलों में रेत, मुरम और गिट्टी की हजारों खदानें संचालित हो रही हैं, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में खदानों से निकलने वाली गिट्टी बिना रॉयल्टी के बाजार में बेची जा रही है। सूत्रों और खनिज विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में करीब 60 प्रतिशत गिट्टी का कारोबार बिना रॉयल्टी के हो रहा है, जिससे सरकारी खजाने को हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

 राजधानी में सरकार की नाक के नीचे खुला खेल 

राजधानी भोपाल में ही लगभग 600 से अधिक गिट्टी-सीमेंट की दुकानें (पीठा) संचालित हैं। इन दुकानों पर गिट्टी की बिक्री तो खुलेआम हो रही है, लेकिन रॉयल्टी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध होना लगभग असंभव बताया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि निजी निर्माण कार्यों के साथ-साथ सरकारी ठेकेदार और एजेंसियां भी बिना रॉयल्टी की गिट्टी का उपयोग कर रही हैं।

 अधिकारियों का हमेशा की तरह एक ही जवाब स्टाफ की कमी कार्रवाई करेंगे 

खनिज विभाग का ‘स्टाफ की कमी’ वाला तर्क जब इस मामले में खनिज विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया जाता है, तो अधिकांश का जवाब एक जैसा होता है—
“स्टाफ की कमी है, जानकारी लेकर कार्रवाई करेंगे।”
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि वर्षों से लीज पर दी गई खदानों की नपती (माप) रिकॉर्ड में दर्ज है, लेकिन मौके पर निरीक्षण बेहद कम होता है।

 कागजों में होता है असेसमेंट 

खदानों का असेसमेंट हर 6 महीने में होने का दावा किया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार: अधिकारी अक्सर मौके पर नहीं जाते खदान मालिकों द्वारा दी गई जानकारी को ही रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया जाता हैऑफिस में बैठकर ही रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेज दी जाती है

उदासीनता साफ नजर आती है 

वन और सरकारी जमीन भी खोदी गई कई खदानों के आसपास वन विभाग और अन्य सरकारी जमीनों पर भी अवैध उत्खनन किया गया है। इसके बावजूद किसी भी विभाग द्वारा ठोस आपत्ति या कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासनिक उदासीनता साफ नजर आती है।

 रॉयल्टी में भारी गड़बड़ी 

विशेषज्ञों का दावा है कि वर्तमान में राज्य को जो रॉयल्टी मिल रही है, वह सिर्फ 10 जिलों के बराबर है। अगर पूरे प्रदेश में ईमानदारी से रॉयल्टी वसूली की जाए, तो सरकारी राजस्व में कई गुना (यहां तक कि 100 गुना तक) वृद्धि संभव है।

 मिलीभगत के आरोप 

इस पूरे मामले में खनिज विभाग, स्थानीय प्रशासन और कुछ जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत के आरोप भी सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह गोरखधंधा वर्षों से बिना रोक-टोक के जारी है, जिससे सवाल उठता है कि, क्या यह सब अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव है?

 नीचे दिये गए बिंदु जांच के योग्य हैं 

 सभी खदानों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो 

 रॉयल्टी रिकॉर्ड और वास्तविक खनन का मिलान किया जाए 

 जिम्मेदार अधिकारियों और खदान संचालकों पर कड़ी कार्रवाई हो 

मध्य प्रदेश में गिट्टी खनन से जुड़ा यह खेल सिर्फ अवैध कारोबार नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व की खुली लूट का मामला बन चुका है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह नुकसान और बढ़ता जाएगा।