परमिट वाली 900 पेटी बीयर रास्ते में पकड़ी गई • लाइसेंसी फर्म पर कार्रवाई की तैयारी • बॉन्ड प्रभारी और उपायुक्त आबकारी की भूमिका पर सवाल • पुराने घोटालों की फिर उठी गूंज 

पंकज सिंह भदौरिया 

भोपाल/उज्जैन।मध्यप्रदेश में शराब तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां शाजापुर जिले की लाइसेंसी दुकानों के नाम पर उठाई गई बीयर को कथित रूप से गुजरात तस्करी के लिए भेजा जा रहा था। उज्जैन की नानाखेड़ा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 1 करोड़ रुपए मूल्य की परमिटधारी बीयर से भरे ट्रक को पकड़ लिया।

 परमिट पर उठी 900 पेटी, दुकान तक नहीं पहुंची 

जानकारी के मुताबिक, शाजापुर जिले की पोलायकलां और अवंती बड़ोदिया दुकानों के नाम पर करीब 900 पेटी बीयर परमिट के जरिए वेयरहाउस से निकाली गई। आरोप है कि यह माल निर्धारित दुकानों तक पहुंचने के बजाय गुजरात से सटे अलीराजपुर जिले की ओर मोड़ दिया गया, जहां से तस्करी की योजना थी।

“ ड्राइवर भटक गया” का पुराना बहाना 

कार्रवाई के बाद ठेकेदार पक्ष की ओर से हर बार की तरह “ड्राइवर रास्ता भटक गया” का तर्क दिया जा रहा है। हालांकि, पुलिस इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।

 लाइसेंसी फर्म को नोटिस 

शाजापुर के जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही ने संबंधित लाइसेंसी फर्म मां शारदा फूड्स LLP को नोटिस जारी कर थाने से पूरी जानकारी तलब की है। विभागीय स्तर पर भी जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

आबकारी अधिकारियों पर गंभीर आरोप 

इस मामले में उपायुक्त आबकारी राय, बॉन्ड प्रभारी सुखनंदन पाठक और जिला आबकारी अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इनकी कथित शह के बिना इतनी बड़ी मात्रा में माल का डायवर्जन संभव नहीं है।

 इंदौर के 42 करोड़ के घोटाले का मुख्य आरोपी वेयरहाउस प्रभारी पाठक सवालों के घेरे में 

सुखनंदन पाठक का नाम पहले भी 42 करोड़ रुपए के फर्जी चालान घोटाले में सामने आ चुका है, जिसमें विभागीय जांच में उन्हें दोषी माना गया था। इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उनके इंदौर स्थित ठिकाने पर छापा भी मारा गया था। अब इस नए मामले के सामने आने के बाद पुराने विवाद फिर चर्चा में हैं।

 उड़नदस्ते की निष्क्रियता पर सवाल 

उज्जैन संभाग के उड़नदस्ता प्रभारी हर्षवर्धन राय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अंतरजिला और अंतरराज्यीय तस्करी पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी के बावजूद ऐसी गतिविधियां लगातार जारी हैं।

 राजस्व को भारी नुकसान का अंदेशा 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तस्करी से जहां सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान हो रहा है, वहीं अवैध नेटवर्क को बढ़ावा मिल रहा है।

 अलीराजपुर वही शराब जाती है जिसे गुजरात जाना है 

शाजापुर से उज्जैन होते हुए अलीराजपुर तक फैला यह मामला सिर्फ तस्करी का नहीं, बल्कि सिस्टम में संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।