एमपी नगर में ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त, चेकिंग के नाम पर सिर्फ राजस्व वसूली के आरोप
बोर्ड ऑफिस और एमपी नगर क्षेत्र में जाम से लोग बेहाल; ट्रैफिक टीआई पर व्यवस्था सुधारने के बजाय खजाना भरने की तैयारी मे
भोपाल | राजधानी के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल एमपी नगर और बोर्ड ऑफिस चौराहा इन दिनों बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था की वजह से लगातार चर्चा में है। रोजाना लंबा जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क पर बेतरतीब वाहन संचालन से आम लोग परेशान हैं, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की जगह पुलिस की कार्रवाई केवल वाहन चेकिंग और चालान वसूली तक सीमित दिखाई दे रही है।
ट्रैफिक प्रबंधन की गंभीरता पर और सवाल खड़े
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि सड़क पर ट्रैफिक को सुचारु करने, जाम खुलवाने और अवैध पार्किंग हटाने के बजाय केवल रेवेन्यू बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि चेकिंग अभियान के नाम पर संदिग्ध वाहनों की वास्तविक संख्या तक ट्रैफिक प्रभारी के पास स्पष्ट नहीं है। जब एमपी नगर ट्रैफिक प्रभारी से फोन पर चर्चा हुई कि एक माह में कितने संदिग्ध वाहन पकड़े गए, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। कथित तौर पर उनका कहना था कि “एक्ट पढ़कर ही कुछ बता पाऊंगी।” इस जवाब ने ट्रैफिक प्रबंधन की गंभीरता पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रैफिक पुलिस का मूल उद्देश्य क्या?
स्थानीय व्यापारियों और वाहन चालकों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस का मूल उद्देश्य व्यवस्था दुरुस्त करना है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में प्राथमिकता केवल चालान और वसूली तक सीमित नजर आ रही है। बोर्ड ऑफिस से एमपी नगर तक कई स्थानों पर पीक समय में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोग कई-कई मिनट तक जाम में फंसे रहते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रैफिक पुलिस का काम केवल चालान काटना है या सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाना भी?
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