मध्यप्रदेश में आबकारी विभाग की बड़ी चूक: 350 करोड़ से अधिक ड्यूटी राशि अब तक बकाया
25 मार्च तक जमा होनी थी राशि, नियमों के बावजूद वसूली अधूरी; सरकार कर्ज लेने की तैयारी में
सोम कंपनी से संबंधित व्यापारियों पर भी लगभग 60 करोड़ से अधिक बकाया
✍️पंकज सिंह भदौरिया ✍️
मध्यप्रदेश में एक ओर सरकार वित्तीय संसाधनों की कमी के चलते कर्ज लेने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग अपनी ही निर्धारित समयसीमा में सैकड़ों करोड़ रुपये की ड्यूटी वसूलने में विफल नजर आ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, 25 मार्च 2026 तक जमा होने वाली कुल राशि
₹3,48,47,23,811 (लगभग 348 करोड़ रुपये) की आबकारी ड्यूटी अब तक लंबित है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में केवल कुछ दिन शेष हैं, लेकिन वसूली की गति बेहद धीमी बनी हुई है। बड़े शहर भी पीछे सबसे अधिक बकाया राशि बड़े और राजस्व समृद्ध जिलों से सामने आई है:
भोपाल – ₹61.14 करोड़,सागर ₹35.67करोड़ ,जबलपुर* – ₹25.72 करोड़,मुरैना – ₹23.38 करोड़, इंदौर – ₹14.53 करोड़,नरसिंहपुर – ₹13.47 करोड़, सीहोर – ₹11.74 करोड़ इसके अलावा राजगढ़, रीवा, कटनी, छिंदवाड़ा, रतलाम और रायसेन जैसे जिलों में भी 8 से 10 करोड़ रुपये के बीच बकाया दर्ज किया गया है।
नियम तो ताक पर
शराब व्यापारियों को निर्धारित तिथि (25 मार्च) तक ड्यूटी जमा करना अनिवार्य होता है। समय पर भुगतान न होने पर विभाग को संबंधित लाइसेंसधारी की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) जब्त करने का अधिकार होता है। लेकिन मौजूदा स्थिति में न तो पूरी वसूली हो पाई है और न ही बड़े स्तर पर एफडी जब्ती की कार्रवाई स्पष्ट रूप से सामने आई है।

सवालों के घेरे में आबकारी
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है क्या विभाग जानबूझकर वसूली में ढिलाई बरत रहा है?,क्या बड़े व्यापारियों को राहत दी जा रही है?,या फिर प्रशासनिक स्तर पर दबाव के कारण कार्रवाई नहीं हो रही?
वित्तीय प्रबंधन पर असर
राज्य सरकार पहले ही वित्तीय दबाव में है और कर्ज लेने की स्थिति में पहुंच चुकी है। ऐसे में:समय पर 300+ करोड़ की वसूली न होना,राजस्व प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में आबकारी विभाग की यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्य को राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। अब नजर इस बात पर है कि शेष दिनों में वसूली तेज होती है या फिर नियमों के तहत एफडी जब्ती जैसी सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाती है।
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