फर्जी लेबलिंग, बिना अनुमति उत्पादन, जेल तक पहुंचे अधिकारी—कंपनी पर वर्षों से नियमों के उल्लंघन के आरोप 

पंकज सिंह भदौरिया 

भोपाल/इंदौर:मध्यप्रदेश में शराब कारोबार से जुड़ी सोम डिस्टिलरी एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। कंपनी पर वर्षों से नियमों के उल्लंघन, अवैध गतिविधियों और प्रशासनिक गड़बड़ियों के कई मामले सामने आते रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन मामलों में आर्थिक अनियमितताओं से लेकर आपराधिक प्रकृति तक के आरोप शामिल हैं।

बिना अनुमति प्लांट और टैंक लगाने का मामला 

बताया जाता है कि कंपनी ने बिना अनुमति प्लांट स्थापित किया, जिस पर 1 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई। इसके अलावा 19 टैंक भी बिना अनुमति लगाए गए, जिसके चलते फैक्ट्री 4 महीने से अधिक समय तक बंद रही।

एक्सपायरी बीयर की फर्जी लेबलिंग 

कंपनी पर आरोप है कि एक्सपायरी बीयर के लेबल बदलकर उसकी वैधता 6 महीने से बढ़ाकर 1 वर्ष कर दी गई और उसे दिल्ली भेजा गया। इस मामले में आबकारी आयुक्त और संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की स्थिति बनी, हालांकि भारी राशि देकर वे बच निकले।

कोरोना काल में अवैध गतिविधियां 

कोरोना महामारी के दौरान कंपनी ने बिना अनुमति सैनिटाइजर के नाम पर प्लेन मदिरा बेचने का आरोप झेला। पंजाब जा रही एक गाड़ी पकड़ी गई, जिसके बाद सेंट्रल GST का छापा पड़ा और करोड़ों की टैक्स चोरी सामने आई। हाईकोर्ट के आदेश पर संबंधित मामले में करीब 80 दिन जेल भी हुई।

फर्जी होलोग्राम और ब्रांड उल्लंघन 

इंदौर में फर्जी होलोग्राम लगी शराब जब्त की गई। वहीं किंगफिशर सहित अन्य ब्रांड की पेटेंट बोतलों में शराब भरने के मामले में 1.41 लाख पेटियां नष्ट कराई गईं।

पुराने मामलों में भी लंबित कार्रवाई

वर्ष 2005 में देशी शराब की सप्लाई पूरी न देने पर हाईकोर्ट द्वारा 16 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिया गया था, जो आज तक लंबित बताया जाता है। साथ ही ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद फर्जी आदेशों के आधार पर सप्लाई लेने के आरोप भी लगे हैं।

फर्जी परमिट और अवैध परिवहन 

2013 में बेटमा में 1700 फर्जी परमिट के जरिए अवैध शराब परिवहन का मामला सामने आया था, जिसमें 2023 में डायरेक्टरों को सजा हुई। इसके बाद 4 फरवरी 2026 को लाइसेंस निलंबित किया गया।

गुजरात तक अवैध सप्लाई का नेटवर्क 

सूत्रों के अनुसार, कंपनी पर गुजरात जैसे ड्राई स्टेट में अवैध रूप से शराब सप्लाई करने का आरोप भी है, जिससे करोड़ों का कारोबार किया जा रहा है।

प्रभाव और दबाव के आरोप 

यह भी आरोप है कि विभागीय अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए उनके परिजनों को व्यवसायिक लाभ दिलाए गए। साथ ही, पूर्व में इनकम टैक्स छापे के दौरान जब्त रिकॉर्ड को छुड़वाने के लिए हमले तक की बात सामने आई।

अन्य गंभीर आरोप 
मुरैना में कारावास से जुड़े मामले
विदेशों से फर्जी ऑर्डर के जरिए शराब सप्लाई
प्रदूषण विभाग में फर्जी दस्तावेज देकर अनुमति लेना 
आत्महत्या मामले में कंपनी के डायरेक्टर का नाम सामने आना, लेकिन कार्रवाई न होना 

सोम डिस्टिलरी पर लगे इन आरोपों की संख्या और गंभीरता यह दर्शाती है कि मामला केवल प्रशासनिक उल्लंघन तक सीमित नहीं है,