वेयरहाउस में रखा माल निकालने की तैयारी , कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध 

पंकज सिंह भदौरिया 

भोपाल। 4 फरवरी को आबकारी विभाग के कमिश्नर अभिजीत अग्रवाल द्वारा सोम कंपनी की डिस्टिलरी और बीयर फैक्ट्री का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद से दोनों इकाइयाँ पिछले 18 दिनों से बंद पड़ी हैं। बताया जाता है कि कंपनी लगभग सात जिलों में शराब की आपूर्ति करती रही है और उसके कई ब्रांड कथित रूप से मोनोपली के तहत दुकानों पर बिकते रहे है।सूत्रों के अनुसार 2 फरवरी तक सोम कंपनी का माल बाजार में भरपूर मात्रा में बिक रहा था। संबंधित वेयरहाउस में भी कंपनी का पर्याप्त स्टॉक जमा है। नियमों के अनुसार वेयरहाउस में रखे माल को बिना विधिवत सरकारी प्रक्रिया के बाहर नहीं निकाला जा सकता, लेकिन आबकारी क्षेत्र से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि उक्त स्टॉक को कुछ अधिकारियों की मदद से निकालने की तैयारियाँ चल रही हैं।

पूर्व में एक्सपायरी बीयर बेचने के आरोप 

पूर्व में छत्तीसगढ़ से सोमकंपनी द्वारा एक्सपायरी बीयर को लाकर मध्यप्रदेश में बेचे जाने का मामला भी सामने आया था। उस समय शासन-प्रशासन को गुमराह करने के लिए कुछ मात्रा में शराब का नष्टीकरण दिखाया गया 

कैंप ऑफिस के अधिकारी मु,,,,,,,,ने,,,,,    की भूमिका संदिग्ध 

वर्तमान मामले में भी कैंप ऑफिस में पदस्थ कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ सकते है। सूत्रों के अनुसार कंपनी के प्रति “भावनात्मक नरमी” बरते जाने की चर्चाएँ हैं। स्टेट फ्लाइंग एस्कॉर्ट द्वारा मध्य प्रदेश में खास तौर पर सागर और मुरैना जिले सहित कई जिलों में एमआरपी और अवैध आहाते संचालित करने पर किसी प्रकार का कोई केस नहीं बनाया गया अन्य जिलों में भी सोम के साथ इतनी ही नरमी बरती गई 

पूर्व विवाद और जांच एजेंसियों की कार्रवाई 

सोम कंपनी पर पूर्व में मप्र और देश अधिकतर जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है। लेकिन हर वार कंपनी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते राहत पा जाती है, जिससे अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग लाइसेंस निलंबन के बाद आगे क्या कदम उठाता है और वेयरहाउस में रखे स्टॉक को लेकर स्थिति क्या स्पष्ट होती है।