मध्य प्रदेश में शराब कारोबार से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार रायसेन जिले में पदस्थ तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर वंदना पांडे और प्रसिद्ध सोम कंपनी के बीच सांठगांठ कर 13 करोड़ रुपये की अवैध शराब को छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश लाया गया। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल आबकारी कमिश्नर की जानकारी के बिना किया गया, जबकि जांच के घेरे में अब कई बड़े अफसर और राजनैतिक गठजोड़ भी आ चुके हैं।

 50 ट्रक शराब, 13 करोड़ का घोटाला 

छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश में चोरी-छिपे भेजे गए 50 ट्रक शराब का रिकॉर्ड तक विभाग में नहीं, जो सीधे तौर पर एक सुनियोजित घोटाले की ओर इशारा करता है।

 वंदना पांडे पर गंभीर आरोप, करोड़ों की संपत्ति जांच के घेरे में 

तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर वंदना पांडे पर आरोप है कि उन्होंने व्यापारी के साथ मिलकर अवैध शराब खपाई और करोड़ों की संपत्ति बनाई। भोपाल की पॉश कॉलोनी ‘गोल्डन सिटी’ में उनके नाम दो आलीशान मकानों की जानकारी सामने आई है।

 आबकारी विभाग में अंदरूनी मिलीभगत का अंदेशा 

शराब चोरी का यह बड़ा नेटवर्क सिर्फ एक-दो लोगों का नहीं, बल्कि विभाग के कई अधिकारियों की मिलीभगत का संकेत दे रहा है।

 सोम कंपनी के काले कारनामे 

पहले भी विवादों में रही सोम कंपनी पर अब शराब चोरी, ओवररेटिंग, जीएसटी धोखाधड़ी और अदालत को गुमराह करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। बावजूद इसके, कंपनी का लाइसेंस अभी भी रद्द नहीं हुआ है।
 राजनैतिक संरक्षण की बू 

कंपनी और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने के पीछे कांग्रेस से जुड़ी कुछ बड़ी हस्तियों के संरक्षण की चर्चा भी जोरों पर है। कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कंपनी की मजबूत पकड़ पर भी सवाल उठ रहे हैं।

 आत्महत्या का सनसनीखेज मामला 

यही वो कंपनी है जिसके एक डायरेक्टर ने जगदीश और अजय अरोड़ा को आत्महत्या से पहले वीडियो संदेश में दोषी ठहराया था। यह मामला आज भी न्यायिक प्रक्रिया में है।

शराब घोटाले में जिस तरह से विभागीय अधिकारियों, शराब कंपनी और राजनीतिक रसूखदारों की मिलीभगत सामने आ रही है, यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनैतिक तंत्र की गिरावट का उदाहरण भी है। अब देखना यह है कि जांच निष्पक्ष होती है या फिर इस मामले को भी दफन कर दिया जाएगा।